Showing posts with label friends. Show all posts
Showing posts with label friends. Show all posts

Thursday, May 20, 2010

जी ले खुलके इस पल को...


एक दिन जिंदगी ऐसे मुकाम पर पहुँच जायेगी..
यारी-दोस्ती सिर्फ gtalk तक रह जाएगी..
हर cup coffee की, याद canteen की दिलाएगी ...
और हँसते-हँसते फिर आँखें नम हो जाएँगी...
Office के chamber मे Labs नज़र आएँगी...
पर चाह कर भी proxy नहीं लग पायेगी...
पैसा तो होगा, मगर TREATs की वो वजह खो जाएगी शायद...
जी ले खुलके इस पल को मेरे दोस्त...
क्यूँ कि ज़िन्दगी  इन  लम्हों  को  फिर  से  नहीं  दोहराएगी....!


विराट 

यादों में...

यादों में... (Written BY my MOTHER in loving memory of my FATHER) "कभी सोचा न था, दिन ऐसे भी आएँगे.. जो समझती थी खुद को रानी, वो यूँ ...